जीवन से जुड़ी है चिन्ता,चिन्ता के लिए है मुक्ति,मुक्ति से है आनन्द,आनन्द के लिए आप और आप के लिए पेश है.....
हर वर्ग से जुड़ी सामाजिक,पारिवारिक जीवन के पहलुओं को अपने में समेटे हुए, आपकी पसन्द बनने वाली ऐसी ही एक सम्पूर्ण पत्रिका ।
रविवार, 9 नवंबर 2008
ज़िन्दगी 'Live' त्रैमासिक पत्रिका, अक्टूबर-दिसम्बर,2008
इस पत्रिका के ब्लाग संस्करण के लिए बहुत बहुत बधाई ।
इस संबंध में मेरा सुझाव है कि आप इसका टेक्स्ट वर्जन यहां प्रस्तुत करें, पीडीएफ या फोटो रूप में प्रदर्शन के लिए बेहतर है कि आप प्रत्येक पृष्ट का एक पोस्ट बनायें एवं मुख्य पृष्ट में लेख के शीर्षक के साथ लिंक देंवें । एक साथ सभी पेजों को एक ही पोस्ट में डालने से हमारे जैसे कई जो डायलअप या स्लो नेट का उपयोग करते हैं उन्हें इस पत्रिका की एक भी पृष्ट दिख नहीं पाता दूसरी बात यह कि जो निर्धारित बाईट्स के ब्राड बैंड उपभोक्ता हैं उन्हें एक साथ सभी पृष्टों के भार (मेगाबाईट्स के रूप में) का खर्च एक ही क्लिक में उठाना पडेगा जो पाठकों की सुविधा के अनुसार से उचित नहीं है । मेरे कुछ प्रयास देखें - उदंती.कामगुरतुरगोठ.कामअगासदिया साहित्यशिल्पी
Thanks to Comment on my Post. I m also a poet. But not very Good. I have wrriten some poems. if i want to publish that then what can i do for that. will please tell me. & i become to your friend, if u'll accept. mail me mayankmdgr@yahoo.com or l.o.v.e.g.u.r.u.0088@gmail.com.
हमारा अगला अंक माह अक्टूबर-दिसम्बर 2009 फ़ेस्टिव स्पेशल होगा। लेखकों से निवेदन है कि इससे संबन्धित कोई भी लेख,कहानी,कविता,चुटकले,व्यंग आदि भेज सकते है ।
रचनाकारों से....
रचनाकारों से अनुरोध है कि पत्रिका हेतु वे तीज,त्यौहार,उत्सव,जयन्ती और मौसम के अनुरूप अपनी रचनाएं जैसे (हैल्थ,सौन्दर्य,महिलाओं,बच्चों युवाओं एंव बूढ़ों से सम्बन्धित लेख,कहानी,कविता,गज़ल,चुटकले आदि भेज सकते हैं भेजी गयी रचनाएं मौलिक,अप्रकाशित,और स्वरचित से प्रमाणीकृत होनी चाहिए । रचनाएं साफ लिखी हुई या टंकित होनी चाहिए । अस्वीकृत रचनाएं वापस नहीं भेजी जाएंगी अतः एक प्रति अपने पास अवश्य रखें । स्वीकृत एंव मुद्रित रचनाओं पर किसी प्रकार का भुगतान देय नहीं होगा। रचनाएं इस पते पर भेज सकते हैं । सम्पादक ज़िन्दगी लाईव पत्रिका A-178 , रिद्धि सिद्धि नगर कुन्हाड़ी, कोटा (राज.) 324008 रचनाएं ई-मेल द्वारा भी भेजी जा सकती हैं । रचनाएं कृतिदेव,अर्जुन,कनिका,शुशा या यूनिकोड में ही स्वीकार्य होंगी । ई-मेलः zindgi.live@yahoo.co.in
आपका पत्रिका बहुत ही बढिया है, बहुत सुन्दर है, हम यदी अपने घर मंगवाना चाहें तो हमें क्या करना पड़ेगा,बहुत बहुत धन्यवाद
जवाब देंहटाएंबेहतरीन
जवाब देंहटाएंशुभकामनाएं
आदरणीया,
जवाब देंहटाएंइस पत्रिका के ब्लाग संस्करण के लिए बहुत बहुत बधाई ।
इस संबंध में मेरा सुझाव है कि आप इसका टेक्स्ट वर्जन यहां प्रस्तुत करें, पीडीएफ या फोटो रूप में प्रदर्शन के लिए बेहतर है कि आप प्रत्येक पृष्ट का एक पोस्ट बनायें एवं मुख्य पृष्ट में लेख के शीर्षक के साथ लिंक देंवें । एक साथ सभी पेजों को एक ही पोस्ट में डालने से हमारे जैसे कई जो डायलअप या स्लो नेट का उपयोग करते हैं उन्हें इस पत्रिका की एक भी पृष्ट दिख नहीं पाता दूसरी बात यह कि जो निर्धारित बाईट्स के ब्राड बैंड उपभोक्ता हैं उन्हें एक साथ सभी पृष्टों के भार (मेगाबाईट्स के रूप में) का खर्च एक ही क्लिक में उठाना पडेगा जो पाठकों की सुविधा के अनुसार से उचित नहीं है ।
मेरे कुछ प्रयास देखें -
उदंती.काम गुरतुरगोठ.काम अगासदिया
साहित्यशिल्पी
www.udanti.com
जवाब देंहटाएंwww.gurturgoth.com
www.sahityashilpi.com
www.agasdiya.blogspot.com
आज मुझे आप का ब्लॉग देखने का सुअवसर मिला।
जवाब देंहटाएंवाकई आपने बहुत अच्छा लिखा है।
‘…हम तो ज़िन्दा ही आपके प्यार के सहारे है
कैसे आये आपने होंठो से पुकारा ही नही…’’
आशा है आपकी कलम इसी तरह चलती रहेगी और हमें अच्छी -अच्छी रचनाएं पढ़ने को मिलेंगे
बधाई स्वीकारें।
आप मेरे ब्लॉग पर आए, शुक्रिया.
‘मेरी पत्रिका’ में आज प्रकाशित नई रचना/पोस्ट पढ़कर अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत कराएँ।
आप के अमूल्य सुझावों का 'मेरी पत्रिका' में स्वागत है...
Link : www.meripatrika.co.cc
…Ravi Srivastava
आपकी पत्रिका देखि बहुत अच्छी लगी और मैं यथासंभव सहयोग देने का प्रयास करूंगी.
जवाब देंहटाएंThanks to Comment on my Post.
जवाब देंहटाएंI m also a poet. But not very Good. I have wrriten some poems. if i want to publish that then what can i do for that. will please tell me.
& i become to your friend, if u'll accept.
mail me mayankmdgr@yahoo.com or l.o.v.e.g.u.r.u.0088@gmail.com.
Mynk_Agrwal
पत्रिका बहुत ही अच्छी लगी.
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